Wednesday, 17 May 2017

लाठी ,,तंत्र

लाठी ,,तंत्र
भूलन बाग़ में घूम रहा लोक तंत्र
जन तंत्र को बना लिया भीड़ तंत्र
कुनबे में बिखरा दिया ये कैसा तंत्र
सत्ता मद में झूम रहा भ्रष्ट तंत्र
मुफ्तखोर बना रहा ये तंत्र
चाटुकार राह दिखा रहा भुला तंत्र
योग्य पर अयोग्य बैठा सडा तंत्र
सहिष्णु का प्रमाण धरा कौन सा तंत्र
मूल अधिकार दे रहा ये तंत्र
कानून जेब में सडा रहा ये तंत्र
न्याय बेच मुस्कुरा रहा ये तंत्र
लाठी ले खड़ा देखो यही भीड़ तंत्र
स्वरचित
नवीन कुमार तिवारी ,,